पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को शत शत प्रणाम:
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे!लंबी बीमारी से जूझते हुए 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती होने के बाद उन्होंने गुरुवार की शाम दुनिया को अलविदा कह दिया 93 साल पूरे कर एम्स में अन्तिम सांस लेने वाले अटल बिहारी वाजपेयी पिछले लगभग 12-13 वर्षो से राजनीति से ओझल थे! प्रधानमंत्री के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी जी कि विदेश और सुरक्षा नीतियां उनके अपने व्यक्तित्व को परिलक्षित करती है- साहस, संतुलन और सभी के लिए सदभावना इन गुणों के कारण ही उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सभी का सम्मान अर्जित किया और जनता पार्टी कि सरकार में विदेश मंत्री के रूप में और फिर प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने जिस तरह विदेश नीतियों को आकार दिया वह एक मिसाल ही है! देश हित में बड़े फैसले लेने का साहस दिखाने का ही उदाहरण था मई 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण
वह जानते थे कि इसका क्या असर होगा फिर भी वह आगे बढ़े!वाजपेयी जी ने जिस तरह एक कामयाब विदेश नीति का नेतृत्व किया उसने पूरी दुनिया के समीकरण को ही बदल डाला! वह दुनिया दुनिया को यह भरोसा दिलाने में सफल रहे कि भारत एक ज़िम्मेदार देश है! पोखरण परीक्षण के दो साल बाद ही अमेरिका राष्ट्रपति बिल किलंटन ने भारत कि यात्रा कि और यही से भारत-अमेरिका संबंधो के एक नए युग का आगाज हो गया!
अटल बिहारी वाजपेयी जी हमारे देश के ने केवल प्रधानमंत्री थे बल्कि वह एक योद्धा भी थे जिन्होंने अपनी सूझ-बुझ से भारत देश को एक नया मुकाम दिया और भारत को विकासशील देश बनाया नए नए परीक्षण किये और उसमे सफलता भी हासिल कि और इसके चलते वाजपेयी जी को भारत रतन से भी नवाजा गया ! 