तन और मन को शक्ति प्रदान करने के लिए सूर्य नमस्कार एक बहुत ही उपयोगी आसन है! इसका वर्णन हमारे शास्त्रो में भी मिलता है !यह एक प्रभावशाली आसन है !अगर आप इस आसन को नियमित रूप से करेंगे तो न केवल शरीर के जोड़ो की समस्या दूर होगी बल्कि मांसपेशिया भी ढीली होगी जिससे हमारे शरीर को बहुत आराम मिलता है !हम स्वस्थ और ताजगी का अहसास करते है ! सूर्यनमस्कार करते समय 12 आसन किये जाते है! जिससे आपके शरीर के आंतरिक अंगो की भी मालिश हो जाती है! दिन में आपको किसी भी वक़्त थकान महसूस हो तो सूर्य नमस्कार के अभ्यास के साथ आप अपनी थकान को दूर कर सकते है, ओर अपनी खोई हूए शारारिक ओर मानसिक शक्ति को प्राप्त कर सकते है! अगर आप सूर्य नमस्कार का अभ्यास कर रहे है !तो मंत्रो का अभ्यास जरूर करे इससे आपको विशेष लाभ मिलता है, और मन में शान्ति भी बनी रहती है, और आप एक बहुत ही अच्छा अनुभव करेंगे! सूर्य नमस्कार करते समय हम 12 आसन करते है!
पहला जो आसन होता है! वह है प्रार्थना कि मुद्रा पूरे शरीर को शिथिल करते हुए प्रार्थना की मुद्रा में दोनों हाथ जोड़कर खड़े होना !
दूसरा आसन है! हस्तातनासन :कंधो की चौड़ाई के बराबर दोनों हाथो और सिर के धड़ को पीछे की ओर झुकाये!
तीसरा आसन है! पादहस्तासन :जिसमे हम सामने कि ओर झुकते हुए उंगलियों और हाथो को जमीन पर टिकाए तथा सिर को घुटने से स्पर्श करने की कोशिश करे !
अश्रसेचलनासना : इसमें बाये पैर को पीछे कि ओर फैलाये तथा दाये पैर को मोड़िये ओर हाथ सीधे रखिये! ध्यान रखिए शरीर का भार दोनों हाथो बाये पैर के पंजे बाये घुटने व दाये पैर कि उंगलियों पर रहेगा! अंतिम स्थिति मे कमर को धनुषाकार दीजिए ओर सिर को पीछे उठाइये !
पर्वतासन :दाये पैर को सीधा करके अपने नितंबो को ऊपर की ओर उठाइये! अपने सर को नीचे रखिए तथा हाथो को जमीन पैर स्पर्श कराए !
अष्टांग प्रणाम :शरीर को इस प्रकार जमीन कि तरफ झुकाए कि अंतिम स्थिति में दोनों पैरो कि उंगलियों ,दोनों घुटने ,सीना ओर ठुडी जमीन को स्पर्श करे !
भुजंगासन :फिर हाथो को सीधा रखते हुए शरीर को कमर से ऊपर उठाइये ओर सिर को पीछे की ओर झुकाइए!
पर्वतासन :भुजंगासन अंतिम अवस्था है इसके बाद अष्टम स्थिति मे अपने शरीर को पर्वतासन मे लाइए !
अश्रृ संचालनासन : पर्वतासन के बाद अपने शरीर को अश्रृ संचालनासन की स्थित मे लाइए!
पाद हस्तासन:अश्रृ संचालनासन के बाद अपने शरीर को वापिस तृतीय स्थिति पाद हस्तासन मे लाइए!
हस्तातनासन:पादहस्तासन के बाद अपने शरीर को वापिस दितीय स्थिति हस्तोतानासन में लाइए !
प्रार्थना कि मुद्रा:हस्तोतानास के बाद अपने शरीर को प्रथम स्थिति यानि प्रार्थना की मुद्रा में वापिस लाइए!
आप सूर्य नमस्कार के निरंतर अभ्यास से स्वस्थ ओर सुन्दर काया को प्राप्त कर सकते है! सूर्य नमस्कार करने से पसीना निकलता है जिससे दूषित तत्व शरीर से बहार निकलते है, ओर मोटापा भी दूर होता है ! यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही लाभदायक है ! हमे इसे नियमित रूप से करना चाहिए!
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